Mutual Funds Personal Finance

जानिए कितने तरह के होते हैं म्यूचुअल फंड्स?

फंड्स में एंट्री और एग्जिट और समय अवधि के आधार पर म्यूचुअल फंड्स 3 प्रकार के होते हैं।
(1) ओपन एंडेड फंड्स
(2) क्लोज्ड एंडेड फंड्स

(3) इंटरवल फंड्स

ओपन एंडेड फंड्स:
ओपन एंडेड फंड्स में निवेशक कभी भी एंट्री और एग्जिट कर सकते हैं। न्यू फंड ऑफर (NFO) के बाद भी निवेशक ओपन एंडेड फंड्स में एंट्री कर सकते हैं। जब मौजूदा निवेशक किसी फंड में अतिरिक्त यूनिट खरीदते हैं तो इसे सेल ट्रांजैक्शन कहा जाता है। ऐसे ट्रांजैक्शन नेट एसेट वैल्यू (NAV) के बाज़ार मूल्य पर पूरे किए जाते हैं। जब निवेशक स्कीम की यूनिट्स लौटाने का फैसला लेता है और बराबर वैल्यू मिल जाती है तो इसे री-पर्चेज ट्रांजैक्शन कहा जाता है। री-पर्चेज प्राइस भी नेट एसेट वैल्यू से जुड़ा होता है। निवेशक पूर्ण या आंशिक रूप से स्कीम से बाहर हो सकते हैं। स्कीम बंद होने की कोई समयसीमा नहीं होती है। फंड में निवेशकों की एंट्री और एग्जिट से यूनिट कैपिटल नियमित तौर पर बदलते रहते हैं।

क्लोज्ड एंडेड फंड्स:
क्लोज्ड एंडेड फंड्स का फिक्स्ड मैच्योरिटी पीरियड होता है। निवेशक क्लोज्ड एंडेड फंड्स में न्यू फंड ऑफर यानी NFO के दौरान ही निवेश कर सकते हैं। हालांकि फंड के यूनिट्स की NFO के बाद स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग होती है। स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग के जरिए फंड के यूनिट की ट्रेडिंग होती है। क्लोज्ड एंडेड फंड्स के लिए लिस्टिंग अनिवार्य है। NFO के बाद अगर कोई निवेशक क्लोज्ड एंडेड फंड्स में निवेश करना चाहता है तो उसे स्टॉक एक्सचेंज में यूनिट बेचने वाले को ढ़ूंढ़ना पड़ेगा। इसी तरह अगर कोई निवेशक यूनिट बेचना चाहता है तो स्टॉक एक्सचेंज पर खरीदार ढ़ूंढ़ना पड़ेगा। न्यू फंड ऑफर के बाद दो पार्टी स्टॉक एक्चसेंज के जरिए ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। स्कीम के यूनिट कैपिटल में इन ट्रांजैक्शन से कोई बदलाव नहीं होगा। चूंकि NFO के बाद फंड के यूनिट की खरीद और बिक्री स्टॉक एक्सचेंज के जरिए दो अलग-अलग निवेशकों के बीच होगी और फंड्स की इसमें कोई भागीदारी नहीं होगी। ट्रांजैक्शन प्राइस NAV से अलग होगा। ट्रांजैक्शन वैल्यू स्टॉक एक्सचेंज पर फंड के यूनिट की मांग और सप्लाई पर भी निर्भर करेगा और NAV से ऊपर या नीचे भी हो सकता है।

इंटरवल फंड्स:
इंटरवल फंड्स में ओपन एंडेड और क्लोज्ड एंडेड फंड्स दोनों की खूबियां होती है। आमतौर पर इंटरवल फंड्स क्लोज्ड एंडेड होते हैं, लेकिन पूर्व निर्धारित अंतराल पर ओपन एंडेड हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर इंटरवल स्कीम हर साल दो बार 15-15 दिनों के लिए ओपन एंडेड हो जाएगा। जैसे मान लीजिए 1 अप्रैल से 15 अप्रैल और फिर 1 सितंबर से 15 सितंबर के दौरान स्कीम ओपन एंडेड हो जाएगा। इंटरवल फंड्स में निवेशकों के लिए फायदा होता है कि क्लोज्ड एंडेड फंड्स की तरह यूनिट खरीद-बिक्री के लिए पूरी तरह से स्टॉक एक्सचेंज पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। हालांकि निश्चित अंतराल पर फंड के यूनिट्स स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट किए जाते हैं ताकि निवेशक फंड से निकल सकें। इंटरवल फंड्स जब ओपन एंडेड बन जाते हैं तो इस अवधि को ट्रांजैक्शन पीरियड भी कहते हैं। ट्रांजैक्शन पीरियड बंद होने और अगले ट्रांजैक्शन पीरियड शुरू होने के बीच की अवधि को इंटरवल पीरियड कहते हैं। ट्रांजैक्शन पीरियड की न्यूनतम अवधि 2 दिनों की होती है, और इंटरवल पीरियड की न्यूनतम अवधि 15 दिनों की होती है। ट्रांजैक्शन पीरियड के अलावा यूनिट की बिक्री या दोबारा खरीद की मंजूरी नहीं होती है।

फंड्स के मैनेजमेंट यानी प्रबंधन के आधार पर दो तरह के म्यूचुअल फंड्स होते हैं:

(1) एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स
(2) पैसिवली मैनेज्ड फंड्स

एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स:
एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स में फंड मैनेजर के पास फंड के उद्देशयो के दायरे में रहते हुए निवेश पोर्टफोलियो के चुनाव की आजादी होती है। ऐसे फंड्स में फंड मैनेजर की भूमिका ज्यादा होने की वजह से फंड को चलाने की लागत भी ज्यादा होती है। निवेशक भी एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स से बाज़ार से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखते हैं।

पैसिवली मैनेज्ड फंड्स:
पैसिव फंड्स का निवेश तय इंडेक्स के आधार पर होता है, इंडेक्स का प्रदर्शन ऐसे फंड्स ट्रैक करते हैं। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए अगर कोई पैसिव फंड NSE के निफ्टी-50 इंडेक्स को को ट्रैक करता है तो फंड का निवेश निफ्टी-50 में शामिल शेयरों में ही होगा। हर शेयर में निवेश का हिस्सा उसी अनुपात में होगा जितना निफ्टी-50 में उन शेयरों का वेटेज होता है। कुल मिलाकर कहें तो तय इंडेक्स का एक प्रतिरूप होगा। ऐसे फंड्स का डिजाइन इस तरह का होता है कि ये बाज़ार से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे। इन फंड्स को इंडेक्स फंड्स भी कहते हैं। ऐसे फंड्स का पोर्टफोलियो इंडेक्स के हिसाब से तय होता है, ऐसे में फंड मैनेजर की भूमिका काफी कम होने से फंड को चलाने की लागत भी कम होती है।

TGN Bureau
Gold was always an attractive investment instruments. People from all age group love to have gold in their kitty. There are very clear perceptions among all investors about gold is safe, durable and investment value. After extensive research by two friends from Business Journalism background decided to launch the news website for gold. With clear vision in their mind about readers and prospect they made up their mind to start the website. Today Gold News is one stop solution for gold related news and analysis with strong research and insights. With compelling combination of live gold prices, expert analysis, substantial market information with personal finance news as well.
http://www.todaygoldnews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *