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सोने की हॉलमार्किंग (Hallmark) क्या है, ज्यादा जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर

हॉलमार्किंग (Hallmark): सोना (Gold) खरीदना तो हर कोई चाहता है, लेकिन इसकी शुद्धता की परख खरीदारों की राह का सबसे बड़ा रोड़ा होता है। हालांकि बड़े शहरों में हॉलमार्किंग के जरिए सोने (Gold Price Today) की शुद्धता की पहचान हो जाती है, लेकिन छोटे शहरों और कस्बों में तो हॉलमार्किंग जैसी चीज दूर-दूर तक नहीं दिखती है। ऐसे में कैसे सोने की शुद्धता को पहचाना जाए ये सबसे बड़ी चुनौती है।

हॉलमार्किंग को लेकर सरकार काफी काम कर रही है, लेकिन अभी भी इस दिशा में काफी कुछ करने की जरूरत है। क्योंकि शहरी इलाकों में तो हॉलमार्किंग वाली ज्वेलरी मिल जाती है, लेकिन जब ग्रामीण इलाकों की बात आती है तो वहां जागरुकता की काफी कमी है। वहां के लोगों से 22 कैरेट का दाम लेकर 18 और 14 कैरेट के सोने भी थमा दिए जाते हैं। ऐसे में जब वो अपनी ज्वेलरी या सोने को बेचने के लिए जाते हैं तो उन्हें काफी कम दाम मिलता है। इन दिक्कतों को सिर्फ हॉलमार्किंग के ज्यादा से ज्यादा सेंटर बनाकर ही हल किया जा सकता है।

क्यों जरूरी है सोने की हॉलमार्किंग

हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता का प्रमाण होता है। भारतीय स्टैंडर्ड को गोल्ड में मार्क करना ही हॉलमार्किंग है। कैरेट के जरिए भारतीय स्टैंडर्ड को गोल्ड में अंकित किया जाता है। बिना हॉलमार्किंग के गोल्ड ज्वेलरी लेने पर अगर आप बेचने जाएंगे तो आपको भाव कम मिल सकता है, क्योंकि आपके सोने की शुद्धता के लिए कोई सर्टिफिकेट नहीं होगा। मान लीजिए आपने 22 कैरेट की ज्वेलरी खरीदी होगी, लेकिन जब बेचने जाएंगे तो आपकी ज्वेलरी 18 कैरेट की निकल जाए तो ऐसे में नुकसान बड़ा हो सकता है। इन्हीं दिक्कतों को दूर करने के लिए हॉलमार्किंग जरूरी है। बड़े शहरों में तो खरीदार बिना हॉलमार्किंग वाली गोल्ड ज्वेलरी लेना बिल्कुल पसंद नहीं करते हैँ।

हॉलमार्किंग पर मौजूदा नियम

अभी हॉलमार्किंग जरूरी नहीं बल्कि स्वैच्छिक रूप से है। इसके लिए जरूरी कानून भी जल्द लाने की तैयारी चल रही है। मौजूदा दौर में हॉलमार्किंग सेंटर कम होने से पूरे देश में इसे जरूरी नहीं किया गया है। हालांकि इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है। अभी BIS यानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स सोने की शुद्धता का सर्टिफिकेट देता है। सोने की हॉलमार्किंग के लिए अभी तीन ग्रेड तय हैं। 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट तीन ग्रेड तय किए गए हैं। ये तीनों ग्रेड अभी सिर्फ स्वैच्छिक हैं, जरूरी नहीं हैं। जो असली हॉलमार्क का मार्क होगा उस पर भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS का तिकोना निशान होता है। साथ ही उस ज्वेलरी या सोने पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। साथ ही ज्वेलरी बनने का साल और बनाने वाले का भी लोगो होता है।

कैसे पहचानें हॉलमार्क?

हॉलमार्क वाली ज्वेलरी पर BIS का मुहर लगा रहता है। साथ ही हॉलमार्क के साल का भी जिक्र किया जाता है। सोने की शुद्धता की कैरेट बताने के लिए सोने पर K लिखा होता है। 22K का मतलब 91.6% प्योरिटी यानी 916 गोल्ड। सोने की शुद्धता के हिसाब से दिए जाने वाले अंक इस तरह के रहते हैं। 24 कैरेट यानी 99.9% की शुद्धता, 23 कैरेट में 95.8% की शुद्धता, 22 कैरेट यानी 91.6% की शुद्धता, 21 कैरेट यानी 87.5% की शुद्धता, 18 कैरेट यानी 75% की शुद्धता, 17 कैरेट यानी 70.8% की शुद्धता और 14 कैरेट यानी 58.5% की शुद्धता होती है।

हॉलमार्किंग से जुड़ी बेसिक बातें

हॉलमार्किंग की पूरी प्रक्रिया साढ़े चार घंटे में पूरी होती है, और एक पीस ज्वेलरी हॉलमार्किंग के लिए 35 रुपए लगते हैं। देशभर में फिलहाल 700 से ज्यादा हॉलमार्किंग सेंटर हैं और इसे लगातार बढ़ाया जा रहा है। 24 कैरेट गोल्ड सबसे शुद्ध होता है, पर इससे ज्वैलरी नहीं बनती है। गोल्ड ज्वैलरी 22 या 18 कैरेट के सोने से बनती है। ज्वेलरी में हमेशा सोने के साथ थोड़ी मात्रा में कोई और मेटल को मिक्स करना पड़ता है, तभी ज्वेलरी सही बन पाएगा। 24 कैरेट गोल्ड की ज्वेलरी बनाने पर ज्वेलरी का आकार बदल सकता है, इसलिए इसमें कोई और मेटल मिक्स किया जाता है।

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